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Insurance Vivad Samadhan - बीमा शिकायतें, जीवन बीमा, स्वास्थ्य और सामान्य बीमा शिकायतें, IRDA शिकायतें और बीमा लोकपाल

भारतीय बीमा बाजार, चाहे सामान्य या स्वास्थ्य या जीवन बीमा, चालाक और बेईमान बीमा एजेंटों और Insurance companies से भरा हुआ है, जो अनजान ग्राहकों को अपना निशाना बनाने के लिए तैयार हैं। ऐसे में ग्राहक न केवल अपना पाना वित्तीय नुकसान करवा लेते हैं बल्कि अपने future क़े लक्ष्यों से भी चूक जाते है। भारत में बीमा की दो व्यापक श्रेणियां हैं - जीवन बीमा और सामान्य बीमा (General Insurance)।

हमारी फीस: प्रारंभिक भुगतान 299 / - (+ टैक्स) + बाद में क्लेम सेटलमेंट में दी गई राशि का 10%।.

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हम अपने ग्राहकों को उनके Insurance claim को अस्वीकार करने या उचित तरीके से हल नहीं करने या उचित समय में हल नहीं किए जाने पर समाधान खोजने में सहायता करने के लिए अथक प्रयास करते हैं। हम संबंधित अधिकारियों के साथ सभी पत्राचार, सूचना और फाइल के मसौदे तैयार करते हैं। हम अपने ज्ञान और अनुभव के साथ, जानते हैं कि परिणाम कैसे प्राप्त करें और उचित प्रक्रियाएं और प्रासंगिक प्राधिकरण क्या हैं। जैसे की हमारी Technology संचालित कंपनी है, आप भारत के किसी भी कोने से हमारी मदद ले सकते हैं।

विभिन्न प्रकार की बीमा (Insurance) पॉलिसियां

कार, बाइक, स्वास्थ्य, घरेलू सामान, कारखाने की संपत्ति, समुद्री बीमा आदि की क्षति को कवर करने के लिए खरीदी गई नीतियां सामान्य बीमा (General insurance) की श्रेणी में आती हैं। एक ग्राहक ने बड़ी उम्मीद के साथ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में निवेश किया होगा यह सोच क़े की स्वस्थ्य सम्बंधित समस्या होने पर यह पालिसी उसकी मदद करेगी। लेकिन उसे पता चलता है कि policy की शर्तें ऐसी हैं कि कई बीमारियां उस समय तक कवर नहीं होती हैं जब तक कि पॉलिसी 3 साल या 4 साल पुरानी नहीं हो जाती। सबसे खराब स्थिति में बीमा कंपनी मन घडन्त कारणों से किसी भी दावों को reject कर सकती है।

कार/बाइक बीमा के मामले में भी वास्तविक क्षति के दावों को न मानने के मामले सामने आए हैं। किसी शून्य मूल्यह्रास (zero depreciation) पालिसी क़े मामले में भी claim क़े समय पता चलता है कि प्लास्टिक भागों के लिए दावे पर 50% कटौती की गई है। कुछ मामलों में, कार में आग लग जाती है और बीमा कंपनी मन घढंत आधार पर इस दावे को खारिज कर देती है कि यह स्वाभाविक रूप से नहीं हुआ था, यानि जान भुज कर कार में आग लगाई गयी थी।

विवाद की स्थिति में आपको गुहार लगाने क़े लिए अलग अलग विकल्प प्राप्त है। विवाद के मामले में, सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि आप ग्राहक सेवा कॉल सेंटर से संपर्क करें, यदि आप संतुष्ट नहीं हैं तो आपके पास Greivance cell, बीमा लोकपाल और उपभोक्ता अदालत तक पहुंचने का विकल्प है। आप बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) तक भी पहुँच सकते हैं।

IRDA ने चीजों को बेहतर बनाने के लिए भी पहल की है। इसने ग्राहकों की समस्याओं को हल करने के लिए एकीकृत शिकायत प्रबंधन प्रणाली (IGMS) लॉन्च किया है। हालांकि, कई बार लोग शिकायत करते हैं कि यह प्रणाली काम नहीं कर रही है या बेतुके परिणाम दे रही है। कभी-कभी, ग्राहक वास्तव में शिकायत दर्ज करवा पता है, लेकिन इसका बीमा कंपनी के काम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है और शिकायत अनसुलझे रहती है।

बीमा पालिसी लेने क़े कारण

मूल रूप से, बीमा पॉलिसी, चाहे वह General हो या Life, जीवन या संपत्ति के नुकसान के मामले में नुकसान की लागतों को कवर करने के लिए खरीदी जाती है। प्रत्येक नीति क़े साथ कई Rider और शर्तें जुड़े होते हैं और उन्हें समझना यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि आपको वह प्राप्त हो जिसके आप नुकसान के मामले में हकदार हैं। साथ ही यह भी जरुरी है की बहुत अधिक की उम्मीद बंधा क़े आपको बेवकूफ न बनाया जाय। हमें पर्याप्त सावधानी बरतनी चाहिए कि एजेंट / मध्यस्थ हमें बेवकूफ बनाने में सक्षम न हों।

पालिसी खरीदना:

यह लाभकारी बीमा खरीदने का प्रारंभिक चरण है, इसमें हम एजेंट या ब्रोकर के साथ बातचीत करके हमारी आवश्यकताओं को समझाते हैं और उसी के अनुसार वह कुछ schemes हमें suggest करते हैं। हम पालिसी से सम्बंधित ज्यादा से ज्यादा समझने की कोशिश करते हैं और अपने विवेक क़े अनुसार कोई एक पालिसी खरीद लेते हैं।

Claim Settlement Ratio ( दावा निपटान अनुपात)

यह बहुत महत्वपूर्ण शब्द है और हमें इसके बारे में पालिसी खरीदने से पहले सावधान रहना चाहिए। यह हमें ग्राहकों द्वारा दायर किए गए कुल दावों में से बताता है कि उस विशेष बीमा कंपनी द्वारा कितने दावे Pass किए गए हैं। यह अनुपात IRDA सहित विभिन्न वेबसाइटों पर आसानी से उपलब्ध है। सीएसआर (CSR) जितना अधिक हो उतना बेहतर है, इन दिनों 94% या उससे अधिक के सीएसआर को अच्छा माना जाता है।

फ्री लुक पीरियड

हमें पता होना चाहिए कि फ्री लुक पीरियड के 15 दिन क़े लिए वैध होता है। इसका मतलब है कि एक बार पॉलिसी बांड प्राप्त करने के बाद, हम इसे ध्यान से देख सकते हैं और इसमें उल्लिखित सभी लाभों और नियमों और शर्तों को पढ़ सकते हैं। अगर हमें यह हमारी उम्मीदों के मुताबिक नहीं मिला तो हम 15 दिन क़े अंदर अंदर पॉलिसी सरेंडर कर सकते हैं और जो पैसा चुकाया है उसका रिफंड पा सकते हैं।

प्रीमियम का भुगतान

जीवन बीमा पॉलिसी के मामले में - प्रीमियम सालाना, छमाही, त्रैमासिक और मासिक हैं। हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि प्रीमियम का भुगतान समय पर किया जाए और पॉलिसी लैप्स न हो। कई बार बीमा कंपनियां प्रीमियम भुगतान की नियत तारीख के बाद भी कुछ ग्रेस अवधि की अनुमति देती हैं। हम आम तौर पर यह पता लगाते हैं कि पॉलिसी के लिए ग्रेस पीरियड क्या है और ग्रेस पीरियड के अंत तक प्रीमियम के भुगतान में देरी करते है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक बार प्रीमियम की देय तिथि समाप्त हो गई है, हालांकि ग्रेस अवधि हो सकती है लेकिन ग्रेस अवधि में पॉलिसी का कवरेज लागू नहीं होता है। सरल शब्दों में अगर ग्रेस अवधि के दौरान कुछ गलत होता है तो बीमा कंपनी द्वारा कोई बीमा राशि देय नहीं होगी।

Claim दायर करना

जीवन या संपत्ति के नुकसान के एक दुर्भाग्यपूर्ण मामले में, हमें बीमा कंपनी के साथ दावा दायर करने की आवश्यकता हो सकती है। हमें जल्द से जल्द संभव समय पर ऐसा करने की कोशिश करनी चाहिए। बीमा कंपनियां घटना के 24 घंटों के भीतर दावा दायर करने के लिए कह सकती हैं, लेकिन यह आदर्श स्थिति है और अनिवार्य नहीं है।

दावा निपटान में अस्वीकृति या देरी

यदि बीमा कंपनी दावे या दस्तावेज को प्रस्तुत करने में संदेह करती है, तो वह चीजों के आगे स्पष्टीकरण के लिए कह सकती है। आमतौर पर, कंपनियां दावे के निपटान के लिए एक सर्वेक्षक या किसी अधिकारी की नियुक्ति करती हैं। शिष्टाचार के साथ उसे चीजों को समझाना बेहतर है, उसके लिए कोई रिश्वत देने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह न केवल अनैतिक बल्कि विपरीत फल दे सकता है। यदि आप पाते हैं कि अनुचित विलंब या दावे को अस्वीकार कर दिया गया है, तो आप हमेशा कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

ऋण प्राप्त करना

बचत जीवन बीमा पॉलिसियों (टर्म इंश्योरेंस प्लान्स में नहीं) के मामले में, पॉलिसी खाते में संचित शेष राशि के खिलाफ ऋण प्राप्त करने का प्रावधान रहता है। आप अपनी बीमा कंपनी से जाँच करें और पता करें कि कितनी राशि जमा है और वह राशि जो आप ऋण के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।

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